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बिहार में इफ्तार डिप्लोमेसी: नीतीश कुमार और चिराग पासवान की दावतें सियासी गलियारों में चर्चा का विषय

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पटना: बिहार की राजनीति में आगामी 16 मार्च का दिन बेहद अहम होने जा रहा है, जब राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान होगा और उसी शाम नतीजे घोषित किए जाएंगे। वर्तमान संख्या बल और राजनीतिक समीकरणों के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा सांसद बनना लगभग तय माना जा रहा है। इस संभावित जीत के ठीक दो दिन बाद, यानी 18 मार्च को मुख्यमंत्री आवास, 1 अणे मार्ग में एक भव्य इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया है। यह इफ्तार हर साल की तरह इस बार भी विशेष होने वाली है, क्योंकि साल में केवल एक बार ही सीएम हाउस के दरवाजे इफ्तार के लिए खुले हैं। इस बार नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच इफ्तार की तैयारियों को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है और जिला प्रशासन भी इसे सफल बनाने के लिए पूरी तरह जुटा हुआ है। बिहार राज्य सुन्नी बोर्ड के अध्यक्ष इरशादुल्लाह ने इस आयोजन को लेकर खुशी जाहिर की है और कहा कि नीतीश कुमार ने मुस्लिम समुदाय के विकास के लिए लगातार काम किया है, इसलिए यह दावत समुदाय के लिए विशेष महत्व रखती है। उन्होंने बताया कि इस इफ्तार को केवल धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं बल्कि नीतीश कुमार की नई राजनीतिक पारी और उनके राज्यसभा जाने के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।
वहीं, दूसरी ओर, लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने 16 मार्च को अपनी पार्टी के कार्यालय में इफ्तार पार्टी का आयोजन करने का ऐलान किया है। इस दावत का आयोजन राज्यसभा चुनाव की वोटिंग और नतीजों के दिन ही किया जा रहा है, जिससे यह राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञ इसे बिहार की सियासी रणनीति और ‘इफ्तार डिप्लोमेसी’ के नए आयाम के रूप में देख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार द्वारा 18 मार्च को आयोजित इफ्तार पार्टी का उद्देश्य सभी राजनीतिक दलों और समाज के प्रमुख वर्गों को एकजुट करना और उनके राज्यसभा निर्वाचित होने के अवसर पर विदाई के तौर पर सम्मान देना है। वहीं चिराग पासवान द्वारा मतदान के दिन ही इफ्तार की मेजबानी का मकसद अपनी पार्टी की ताकत और पहुंच का प्रदर्शन करना भी माना जा रहा है।
1 अणे मार्ग में पिछले एक हफ्ते से इफ्तार की तैयारियां चल रही हैं और अब अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी हैं। सुरक्षा, स्वागत और कार्यक्रम प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क हैं। आयोजन में सभी राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। बिहार की सियासत में यह इफ्तार दावतें केवल पारंपरिक धार्मिक समारोह नहीं बल्कि राजनीतिक संकेत और गठजोड़ की दिशा तय करने वाले अवसर के रूप में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि राज्यसभा चुनाव के परिणामों के साथ ही इफ्तार की ये दावतें राजनीतिक संवाद और गठजोड़ में अहम भूमिका निभाएंगी।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना और उसके बाद आयोजित होने वाली इफ्तार पार्टी, भाजपा और जदयू सहित एनडीए के लिए अपने समर्थकों के साथ संपर्क मजबूत करने और विभिन्न समुदायों को जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर साबित होगा। वहीं, चिराग पासवान की पार्टी की दावत राज्यसभा चुनाव के दिन ही होने के कारण उनकी राजनीतिक ताकत और पहुंच का सार्वजनिक प्रदर्शन भी माना जा रहा है। इस प्रकार, बिहार की सियासत में दोनों इफ्तार दावतें अपनी अलग रणनीतिक अहमियत रखती हैं और आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित कर सकती हैं।

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